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'गोपीनाथ मुंडे की असामयिक निधन पर मेरी ये कुछ पंक्तियाँ'

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'गोपीनाथ मुंडे की असामयिक निधन पर मेरी ये कुछ पंक्तियाँ'  पल भर में ही ना जाने क्या से क्या हो गया        इस असामयिक निधन  से  देश स्तब्ध   हो गया         लोकप्रिय  मुंडे जैसा  नेता चिरनिद्रा में सो गया  अभी तो जीत का  जश्न था उफान पर     दहला दिया मौत ने  औचक  तूफान कर  गमगीन है माहौल आज देशवासियों      कोई नहीं ऐसा  गम  जिसे  नहीं साथियों       कुदरत ने तोड़ दी पार्टी की कीमती कड़ी       श्रद्धांजलि में अर्पित आँसुओं की ये झड़ी         होनहार राज नेता पार्थिव शरीर हो गया               कैसी अपूर्णनीय क्षति देश अधीर हो गया ।  शैल सिंह 

अप्रत्याशित कीर्तिमान स्थापित हुआ है

अप्रत्याशित कीर्तिमान स्थापित हुआ है  कहाँ लिखा है किस बाइबिल में और गीता,ग्रन्थ,कुरान में  खून,पानी में अंतर होता हिन्दू,सिख, ईसाई,मुसलमान में।  देश के लिए जनादेश का यह रुझान देखिए  हर गढ़ में खिला कमल का निशान देखिए  बह गए लहर में मोदी के हर वो बाँध देखिए  कैसा जननायक दिया जनता ने है देश को  अप्रत्याशित कीर्तिमान का ईनाम  देखिए किस कद को दिया सत्ता का कमान देखिए मत का तोहफ़ा दिया है कैसा सम्मान देखिए  क्षितिज पर उदयभान नया हिंदुस्तान देखिए  विश्व के मानचित्र पर चमकते हुए भारत का  मोदी रचेंगे जो इतिहास वो शुभ विहान देखिए ।  ममता चोंकर रही है कहीं माया का सा हाल ना हो जाये आज़म चुप रहिये कहीं तंज कसना ना मंहगा पड़ जाये बहुत डाल लीं फर्क,दरारें,अंज़ाम ने,हैरत में डाला होगा पाले से जनाधार क्यों खिसक गया कुछ तो खंगाला होगा भड़काने की अब छोड़ हरकत छिछोरी,चुप बैठिये घर में वरना कहीं ना मिट जाये नामो निशां रहिये श...

चलो लहरों में बह जाएँ

चलो लहरों में बह जाएँ चलो लहरों में बह जाएँ,तूफानी लहर मोदी की बाधाएं कब रोक सकीं हवा का रुख मनमौजी बदलावों की आँधी ने जन मानस को जगा दिया  कद्दावर मोदी का जलवा हर मन को लुभा दिया  । लिखी इबारत पढ़कर सब मंचों पर बोला करते हैं जब मोदी बोलें दहाड़कर शब्द भी डोला करते हैं रसास्वाद लेकर सब सुनते हर हर्फ़ की होती चर्चा इसीलिए हर ओर दिखाई दे खिले कमल का पर्चा । जन सैलाब उमड़ता जिसके हर रैली गलियारों में पेशानी पर बल पड़ जाता विद्रोही खेमों के बाड़ों में विरोधी बाल की खाल उधेड़ते अफ़वाहों की हॉट लगाते धोकर हाथ पड़ जाते पीछे खुद के कद पर बाट लगाते । चुनावों के महासमर में ख़ूब वादों की झड़ी लगा विरोधी  वर्षों सत्ता में रह कर खूब पुआ,माल,मलाई उड़ा विरोधी  हार के डर से सहम गए,मोदी रोको में झोंक रहे ताकत ग़र ईमान से शासन करते जनता करती उनकी हिफ़ाज़त । मोदी देश की ताक़त बनकर उभरे सबल सशक्त बनाना है महाशक्ति का तमग़ा देकर हमें दुनिया को यह बतलाना है भरम में रहने वालों को ललकार हम सबको यह समझाना है आपस ...

अबकी बार मोदी सरकार

अबकी बार मोदी सरकार  तस्वीर बदलने वाली है ,तकदीर संवरने वाली है , दिल्ली के सिंहासन पर ,छवि बेदाग उतरने वाली है दूर होगी अब बदहाली ,चहुँदिश फैलेगी ख़ुशहाली , भारत माँ के मस्तक पर किरण नई बिखरने वाली है क्योंकि सरकार बी.जे.पी. की मोदी की आने वाली है । भ्रष्टाचार मुक्त शासन सपना,सारा देश लगे जिसे घर अपना सुख से मुख जिसने मोड़ लिया घर-बार कभी का छोड़ दिया देश सेवा ही जिसका धर्म-कर्म,जो जाने हिंदुस्तान का मर्म महानायक वह देश पुजारी राष्ट्रद्रोहियों की मति गयी है मारी जन पीड़ा से जो पीड़ित है जिसका सृजन लिए हृदय व्यथित है शख़्सियत बेजोड़ उभरने वाली है ऐसी सरकार बहुरने वाली है । विपक्ष का सारा अमला पीछे पड़ा फिर भी कादा में कमल खिला आसमान झुकाने की कूबत जिसमें जनता को दिखती सीरत उसमें लोक लुभावन व्यक्तित्व लगे अक्षर-अक्षर मनभावन अस्तित्व लगे भाषा शैली बोली आली-आली जिसकी चाल-ढाल है गजब निराली सारी जनता जिसकी कायल है जिसकी प्रसिद्धि से दुश्मन घायल हैं उस आकर्षण में दुनिया बंधने वाली है सरकार मोदी की आने वाली है । हर फन मे...
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 चाहे जो भी अफ़वाहें फैलाई जायं ,चाहे जो भी नुक्स निकाले जायं कोई भी असर होने वाला नहीं है ,जनता सब जानती है इशारों-इशारों में कही बातें समझ लेना चाहिए । एक सच्चे देश भक्त का समादर करना चाहिए, मोदी जी सच्चे हिन्दुस्तानी हैं जो देश की भलाई के लिए अपना सांसारिक जीवन त्याग दिया हो उस पर भी लोग उंगली उठायें ,अटल जी भी ऐसे ही राजनेता थे ,उनपे भी उंगली उठाई जाती थी ,जो सच्चा हिंदुस्तानी देश की संस्कृति के लिए हिन्दुस्तानियों को जगाएं वो सांप्रदायिक हैं ये कहाँ का न्याय है। आजम खां कह सकते हैं कि यदि सारे मुसलमान एक हो जाएँ तो कोई कुछ नहीं कर सकता ,दैनिक जागरण में पढ़ा था ,लेकिन यही बात भारतीय होते हुए भी कोई हिन्दू नहीं बोल सकता,क्योंकि वह सांप्रदायिक हो जायेगा,ये कहाँ का न्याय है ,क्या सारे हिंदुस्तानी एक हो जाएँ तो बाहरी तत्व हमारा कुछ बिगाड़ सकते हैं ,नहीं ना। अफ़सोस कभी ये एक हो ही नहीं सकते ,चाहे जितने सीमाओं के प्रहरीयों के सर कलम कर दिए जायें । जब हमारी संस्कृति और धरोहर का तहस-नहस हुआ था तब क्यों नहीं ऐसी ही आवाजे...

अश्क़ों के इस समंदर से कोई उबार दे

अश्क़ों के इस समंदर से कोई उबार दे चंद रोज की मुलाकात यादों का अम्बार दे  घर बसा कर ज़ेहन में निशां हजार दे किस बात का मलाल चाक-चाक दिल किया  सीने में घुट रहा दम बता मन का गुबार दे , चतुरता से देके दस्तक अचानक से ग़ुम हुए   एहसान मंद कर दिया दिल का आज़ार दे ताउम्र सालेगा लूट सरमाया मुक़दस दिल का बदल लिया कैसे अन्दाज़ भरोसा बेज़ार दे , क्यूँ बेहिसाब तल्ख़ दिल,जरा वो दीदार दे कुछ कर सकूँ सवालात मन को क़रार दे  पाकीज़गी पर शक नहीं ग़म इस बात का  क्यूँ बनाया मुरीद हद तक हक़ बेकार दे , क्यूँ ऐसे किया गुफ़्तगू पहलूनशीं में शुमार दे   साझा किया क्यों राजे-दिल फ़रहत फुहार दे                                     बेरूख़ी से फेर लिया नज़र बिन संवाद के  हैरतजदां हूँ गुजरा मेरे कूचे से बिन ईख़बार दे ,            इतनी तो कर इनायत बता वफ़ादार दे  किया ईश्क़ में दीवाना क्यों इज़हार दे  दिल की धड़कने...

''क्या दिलकशीं में हाल''

  क्या दिलकशीं में हाल      उमंग ले गए तुम तरंग ले गए  ज़िंदगी के रंग सारे संग ले गए  गुजरे हुए लम्हात की हर बात याद आये  वादे जो ज़ज़्बात के अल्फ़ाज़ गुदगुदाए  भींगे प्यार में दो ज़िस्म वो बरसात याद आये  गीत ले गए तुम संगीत ले गए  ग़ज़ल की रूबाई भी मनमीत ले गए , बदले वफ़ा के तुमने जो बख्शीश दी है शुक्रिया  रंजोगम नहीं हैरान हूँ तेरी बेरुखी पे शुक्रिया    जीस्त वास्ते जली जो चन्दन की चिता शुक्रिया   जान ले गए तुम जहान ले गए  ईमान बेच क़ीमती मुस्कान ले गए , मायूसियों की राह में दीपक जलाये बैठी  खिले हसरतों के फूल दिल में दबाये बैठी  जिस राह आओगे रोज़ोशब आँख लगाये बैठी  साज़ ले गए तुम आवाज़ ले गए  अदा नाज़ ले गए तुम अंदाज़ ले गए , जीवन के वियाबानों में रुदादे-ग़मों के सिवा     कुछ नहीं नाला कशीं के पास मेरे मासिवा      चन्द्रमुखी शाम में बस ग़म के पहाड़ों के सिवा  ...