संदेश

फ़रवरी 1, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शीशे सा टूट बिखर नहीं जाऊं कहीं

मेरा दर्द नज़र ना आए किसी को  मुस्कान अधरों पे बिछाये रखती हूॅं । दिल रोये असर ना दिखे किसी को  आनन पर सिंगार सजाये रखती हूॅं । जो आंखों में भरा है पानी लबालब   कहीं छलक पड़े ना दबाये रखती हूं । शीशे सा टूट बिखर नहीं जाऊं कहीं   ख़ुद को दृढ़ सशक्त बनाये रखती हूॅं । शैल सिंह  सर्वाधिकार सुरक्षित