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नाता तुड़ा दिया नईहर के सारे

अभी-अभी बेटी की शादी करके लौटी हूँ बेटी विदा करने का उद्वेलन क्या होता है बेटी वाला ही जान सकता है ,मैं भी अपने बाबूजी की बेटी थी ,अपने प्रियजनों से जुदा होते समय बेटी के मन में क्या आन्दोलन होता है ,वही हृदयस्पर्शी भाव मेरी कविता में व्यक्त है ,यह  हर बेटी की पीड़ा का असह्य व्याख्यान है । पिता ने लाड़ की नदी बहाई माँ ने ममता का सागर भैया के स्नेहिल बाँहों  की बड़ी हुई ओढ़कर चादर , परम्परा के निर्वहन में, मैं रीति की भेंट चढ़ा दी जाऊँगी कोई घोड़ी चढ़कर आएगा डोली में बिठा दी जाऊँगी , गाजे-बाजे साथ बाराती वर आया धूमधाम मेरे द्वारे चुटकी भर सिंदूर मांग भर नाता तुड़ा दिया नईहर के सारे, फूट-फूट रोई माँ मेरी पिता ने रुँधे गले दी ढाढ़स भैया विलख दिए कांधा सौंप दी अपनी पूँजी पारस , आँसुओं की छछनी बाढ़ भी जुदा करने से रोक नहीं पाई सर पे डाल ओहार चूनर की कर दी गई मेरी विदाई , जब से जनम लिया है सुनती आई पराई धन हूँ ये कैसी है विडम्बना ,मैं तुलसी और किसी आँगन हूँ , स्वयं लहू से सींचा माँ ने पिता ने धन दौलत था समझा भैया ने न...

कुछ पंक्तियाँ बिखरी-निखरी

चित्र
१-- कभी काजल के मानिन्द बसे हम उनकी बेजार निगाहों में अब नौबत कि नजरें चुराकर बगल से गुजरा करती उनकी , २-- मेरे ख़्वाबों में दबे पांव आता है कोई आकर मुझे  नींदों से जगाता है कोई , ३-- कम्बख़्त नज़र एक सी आग लगाई दोनों तरफ वहाँ करार उन्हें नहीं इधर चैन बेक़रारी को नहीं , ४-- जल कर मोहब्बत में दिन-रात दिल खाक़ कर लाए न बहारों का लुत्फ़ ले पाये न ख़िज़ाँ के साथ रह पाए , ५-- वायदों का अलाव जलाकर इन्तज़ार किया बहुत ऐतबार ने मगर क़त्ल किया है क़यामत की तरह , ६-- पाठ मोहब्बत का क्या पढ़ाया सबको भूला दिया तूने तो मासूम दिल पर  ऐसा कब्ज़ा जमा लिया पिला कर मय  निग़ाहों की दिखा  अदा के जलवे दूर ज़माने से किया  नकारा निकम्मा बना दिया , ७-- वहाँ घर उनके आई डोली इधर सर मैंने भी सेहरा बाँधा कितनी मजबूर मोहब्बत दुनिया से कर ना पाये साझा घर दोनों के रखना आबाद खुदा इतना तो रहम  करना जैसे राधा संग कांधा, इक दूजे के दिल में बसाये रखना । 8-- सूना कदम्ब सूना जमुना किनार...
हम सबकी परी नन्हीं परी कितनी प्यारी-प्यारी है माँ-पिता की राजकुमारी दादी-दादा घर पधारी है नानी-नाना की दुलारी नर्म फूलों सी सुकुमारी है मह-मह महकी फुलवारी सूने घर में ये अवतारी है बाँहें पालना नाना ने नन्हीं के लिए संवारी है नानी की सुन-सुन लोरी परी करती किलकारी है दीदी,भैया,मामी-मामा ने अंक भर नेह से पुचकारी है ताई-ताऊ सभी मौसियों ने परी की आरती उतारी है ।                           शैल सिंह

गले लग प्रेम का सूता सुलझाओ तो जानें

गले लग प्रेम का सूता सुलझाओ तो जानें ओ भारत के युवा प्रहरी जाबांज़  सिपाही कभी ना होना गुमराह बेतर्कों के झांसों में , बो कर नफ़रत का बीज भीड़ जुटाने वालों प्रेम मोहब्बत की ख़ुश्बू बिखराओ तो जानें क्यूँ निस्प्रयोजन तुम उलझाते हो आपस में गले लगा प्रेम का धागा सुलझाओ तो जानें , जन-मन की पूछ रही हैं सवालिया निग़ाहें  कहाँ गयी पहले वाली रौनक़ त्योहारों की सहमे भय,आतंक से बच्चे,बूढ़े,जवां पूछते  कहाँ गयी पहले वाली धूमधाम बाज़ारों की , कैसे ग्रहण लगा जीवन के मुस्काते रंगों को  कहाँ गया सम्मोहन हरे खेत खलिहानों का  खुद जीओ देश ,समाज ,पड़ोस को जीने दो होली जला,उपद्रवी कुंठित सोच विचारों का  , सपनों का महल बनेगा सजेगा,संवरेगा तब जब रक्षा करना सीखोगे दर औ दीवारों की अनेकता में एकता क्या होती  दिखलाना है    आवश्यकता है बेहतर जीवन में सौहर्द्रों की , प्रेम मोहब्बत इतना प्रगाढ़ बलवान बनायें सामाजिक समरसता के लिए आह्वान करें इंसान,दोस्ती की तस्वीर उजागर कर देखें मिलकर नफ़रत की खाई को शर्मसार करें...

वाह रे मिडिया वाले

वाह रे मिडिया वाले ,तेरी अच्छाई और बुराई दोनों ही चरम पर हैं ,सच्ची बातों के लिए आवाज़ बुलंद करते हो और कभी-कभी तिल का ताड़ बनाने में भी माहिर ,आजाद भारत में व्यक्ति को अपनी अभिव्यक्ति भी स्वछंद और स्वतन्त्र रूप में व्यक्त करने की आजादी नहीं है ।किसी के मुँह से वकार क्या निकली कि तोड़-मरोड़कर  गलत तरीके से गुमराह करने और मतलब निकालने का महारत भी पास रख लेते हो । खैर बुद्धिजीवियों और समझदारों पर तो इसका कुप्रभाव नहीं पड़ता । एक बात तो सत्य है की मोदी की लोकप्रियता और प्रसिद्धि विरोधियों के गले की हड्डी बन गई है ,वरोधी पार्टियां तिलमिला-तिलमिला कर जल भून रही हैं । इसीलिए अनाप-शनाप गुद्दी में गुद्दी निकालती रहती हैं ,लालू इतना घटिया स्तर का भाषण देता है किसी पर जूं तक नहीं रेंगता और कोई सही बात भी बोले तो बवाल हो जाता है राबड़ी जैसे लोग विहार की वागडोर थाम सकते है , बोलने के लिए बहुत कुछ है पर बवाल और टीका टिप्पड़ी सहने की क्षमता नहीं है उददंड और उजड्ढ लोगों की की बेसिर पैर बातें सुनने के लिए ।             ...
सोनिया गांधी ……  , अपने घर से रुख़सती क्या ली भारत के राजकाज पर काबिज हो गई दो चार भाई होगी छोड़ी यहाँ भाइयों के रूप में हजारों सेवक पा गई घर की रहगुजर क्या भूली यहाँ हर रहगुजर पर तेरी तस्वीर लग गई ओ चिड़िया तूं जिस शज़र पर बैठी उस शजर पर और चिड़िया नहीं बैठी तुझे भारत में मोहब्बत ही नही मिली बल्कि सर आँखों पर बिठाया लोगों ने हम ये कैसे कहें तुम्हें हुकूमत प्यारी नहीं क्या हुकूमत बिन चाहे ही मिल गई तेरे चहरे ने इस सर जमीं का भाई चारा छिना एक से एक महारथियों का बाड़ा छीना तेरे पास जो था वो तुझसे ज्यादा हमारा था तेरे प्रेम जाल ने हमसे हमारा छिना यहाँ बहुत से बच्चों के सर का साया नंगा है बच्चों को भारत की संतान बनके रहने दे तूने गिरिजा छोड़ दिया जो तेरा था तूं शिवाला का क्या कभी हो पायेगी तकदीर बदलने के और भी रास्ते हैं  भारत की बहू-बेटी बनके रह वरना सम्मान से चूक जाएगी इक तूं ही बेवा नहीं हुई यहाँ हजारों लाखों बेवाएं हैं जो घर छोड़कर कभी मायके नहीं गईं तेरी वजह से नफ़रतों की दीवार खड़ी हुई बस चन्द नासमझों चाटुकारों की मसीहा ब...

मेरी ये फ़ितरत नहीं दोस्तों

मेरी ये फ़ितरत नहीं दोस्तों  बहारों का आनन्द लेती हूँ मेरी ये फ़ितरत नहीं दोस्तों  कि हवा के संग-संग बह जाऊँ , लोग सूखे पत्रों के मानिन्द बहक,हवा के साथ उड़ते हैं जिधर का रूख़ हवा का हो उधर ही हवा के साथ चलते हैं माहौल के अनुरूप देखा है कि हैं कुछ लोग ढल जाते जैसी जिस जगह की मांग वैसी तुरुप की चाल चल जाते , कड़वा सत्य बुरा होता मगर  मेरी ये फ़ितरत नहीं दोस्तों  सच से बहस में मैं मुकर जाऊँ , भला एक ही इन्सान कैसे जब-तब कुछ नज़र आता जुबां होती तो है एक मगर तरह-तरह की बात कर जाता , लिबास आचरण के उनके आश्चर्य,पल-पल बदलते हैं लोग भलीभांति जानते फिर  क्यूँ कसीदे तारीफ़ों के गढ़ते हैं मैं अडिग सही बात पे होती मेरी ये फ़ितरत नहीं दोस्तों  गिरगिटों का चोला पहन आऊँ , कहें भले लोग बुरा मुझको इसकी परवाह नहीं करती ईश्वर क्या देखता ना होगा चालबाज़ी चाल में है किसकी , चटुकारता की दुर्गन्धों से भभक उठते हैं नथुने मेरे उबटन लगाकर तेल संग क्यों उंगलियां मालिश करें मेरे , ...