खुल कर जियो आज में ज़िन्दगी

मायाजालों में ही फंस कर ना बीत जाए ज़िन्दगानी 
छोटी सी ज़िंदगी है मौज-मस्ती में बिताएं नौजवानी 
उम्र के हैं चार दिन ज़िन्दादिली ज़िंदगी के नाम कर 
बेफिक्र हो ज़िन्दगी का सफ़र सुबह, शाम में रवानी । 

मुश्किलें तमाम तो मुसीबतें भी ज़िन्दगी की राह में 
जीना तो हर हाल में है मुस्कुराना होता हर हाल में 
सपनों के दौड़ में गुजरती जायेगी पीछे से ज़िन्दगी 
ना सोचा ना किया होगा मिलेगा जो लिखा भाग में ।

कौन ऐसा है जिसके ज़िन्दग़ी की नहीं कोई कहानी 
धुवें के छल्ले की तरह उड़ा दें हंस के सारी परेशानी 
ज़िन्दगी के तजुर्बात सीखा देते ठोकरों से सावधानी 
अपनी मौज में रह सीखें सलीका जीने का आसानी ।

ख़्वाहिशों के इंतज़ार में ही ना करते रहो खींचातानी 
कहीं आपाधापी उधेड़बुन में ही कट ना जाए जवानी 
क्या कल की फ़िक्र खुल कर जियो आज में ज़िन्दगी 
कुछ तो सोचा होगा देने वाले ख़ुदा ने हमें ये ज़िन्दग़ी ।

शैल सिंह 
सर्वाधिकार सुरक्षित 


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