मुद्दत से नींद आई नहीं

बहारें भी आ आकर लौट गयीं 
तेरा इंतज़ार करते करते 
खोया चॉंद से चेहरे का नूर  
तेरा इंतज़ार करते करते ।

ना कोई पैग़ाम ना दिलासा 
उम्मीदें कहतीं हैं सब्र कर
गुजरती जा रही है ज़िन्दगी
तेरा इंतज़ार करते करते 
बे-लगाम हो गईं ये ऑंखें
थक गईं पर हार मानतीं नहीं  
जिद पर अड़ी बेक़रार पलकें 
तेरा इंतज़ार करते करते ।

खटखटा कर कुंडिया हवाएं
लौट जातीं चौखट से 
दौड़ पड़ती हर आहट पे
तेरा इंतज़ार करते करते 
इक तेरे दीद की ख़्वाहिश में 
मुद्दत से नींद आई नहीं
जल रहे ख़्वाब जां निकल रही 
तेरा इंतज़ार करते करते ।

आते ना आते भेज तो देते हसीं
ख़्वाब ऑंखों की दहलीज़ पर 
कहीं मौत ना आ जाए मुझे 
तेरा इंतज़ार करते करते ।
अब तो इंतज़ार से भी मुझे 
मुहब्बत सी हो गई है 
करार दे जा उदास ऑंखों को 
इंतज़ार में बेकरार करते करते ।

शैल सिंह 
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