सम्भावनाओं का घर
मनोमस्तिष्क में बस गया है एक गांव
एक बेचैनियों का एक स्मृतियों का घर
एक शिकायतों का एक मोहब्बतों का घर
ऑंखों की दहलीज़ पर एक ऑंसुओं का घर
एक मिलन के अविस्मरणीय निशानियों का घर
एक तलाश का घर कुछ अनकहे दास्तानों का घर
एक आहटों का घर खिलखिलाती महफ़िलों का घर
एक उदासीयों का घर एक टीसती खामोशियों का घर
कभी आओगे बीते लम्हे याद कर,सम्भावनाओं का घर
कभी तो गुफ्तगू करने तुम भी आओ ना इन गांवों के घर।
शैल सिंह
सर्वाधिकार सुरक्षित
बहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंमनोमस्तिष्क में बसा घर ... उदासी की लहर छू गयी मन को।
जवाब देंहटाएंसादर।
-----
नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार ११ नवंबर २०२५ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
विरह और मिलन की सुंदर दास्तान
जवाब देंहटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएं