अबकी बार होली में
केसर रंग,रंग देना पिया अंग
अबकी बार होली में
फाग गीत गाते चैती स्वच्छंद
अबकी बार होली में ।
लोकगीत का छंद
माथे पे रोली गाल गुलाल
कोरी चूनर कर देना लाल
धो देना मन का मलाल
अबकी बार होली में ।
तन भी भींगे मन भी भींगे
आंचल भींगे अंगिया भी भींगे
नीले,पीले,हरे रंग जामुनी डाल
अबकी बार होली में ।
संग तेरे मैं बेसुध नाचूं
ऑंखों में प्रीत की पाती बांचूं
कर देना नेह बरसा निहाल
अबकी बार होली में ।
पिया छल से ना रंगना
बरजोरी बल से ना रंगना
चलने ना दूंगी तेरी कोई चाल
अबकी बार होली में ।
होश ना खोना पीकर भंग
संयम का तोड़ना ना प्रतिबंध
रखना लोक लाज का ख्याल
अबकी बार होली में ।
शैल सिंह
सर्वाधिकार सुरक्षित
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर मंगलवार 3 मार्च 2026 को लिंक की गयी है....
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