गुरुवार, 17 नवंबर 2022

ये वादियां,फिजायें दे रहीं आमन्त्रण

ये वादियां,फ़िज़ाएं दे रहीं आमन्त्रण 

कुर्ग, कोडईकनाल, मुन्नार, लोनावाला
अवकाश का आनंद लेने चलें खंडाला ,

कहीं बीत ना जाये गरमी की छुट्टियां
उधेड़बुन में खुल ना जाये झट स्कूल
अनदेखा,अविगत अनुभव करने का
फिर कचोटता रह ना जाये चित शूल ,

वन की विलक्षण वनस्पतियां देखने
अनुपम उद्यान,रंग-विरंगे उपवन का
ये वादियां,फिजायें दे रहीं आमन्त्रण
लुत्फ़ उठाने को निरूपम मौसम का ,

पर्यटन के अनेक रूपों का रोमांचक
एहसास कराने विलक्षण जहान का
कल-कल बहते झरने पहाड़ बीच से
साक्षात् दृश्य डूबते हुए अंशुमान का ,

सावन की बरसती रिम-झिम फुहारें
उस पर अप्रतिम सौन्दर्य प्रकृति का
भीनी-भीनी ख़ुश्बू सुहाये पावस की
ठंडी हवा के झोंके नैसर्गिक सुंदरता ,

हरी-भरी खूबसूरत लगती पहाड़ियां
झरनों के चतुर्दिक चादर बादल का
कण-कण स्वागत  करती मुग्ध धरा
मानसून के जीवन्त सुरभित रंग का ,

प्राकृतिक सुवास से प्राण प्रस्फुटित
पेड़-पत्ते,जीव-जन्तु ,नदी,पोखर का
छटा मनोहर भाये सुंदर गोधूलि की
शांत,एकांत सदाबहार गिरि दल का ,

प्रकृति का बेजोड़ उपहार समेटे पर्वत 
अलौकिक अनुभूति,मोहक रमणीयता
अनगिनत अनोखा दर्शनीय स्थल यहाँ
बर्फीला रेगिस्तान औ मरुस्थल दिखता ,

अनदेखे कोनों की आओ याद सहेजने
शहरों की हलचल से बिल्कुल अलहदा
जिस सैर से सैलानी दिल हो बाग़-बाग़
आओ देखो मस्त चाँद नीले अम्बर का ,

मदहोशी का आलम फैला दूर-दूर तक
कुनकुनाती धूप चहकती आबोहवा का
आह्लादित मखमली,अनछुई ये वादियां
कौतूहल से चारू श्रृंखला नीलगिरि का ।

अविगत---अनजाना
मंजुल--सुन्दर , चारू--सुन्दर ,
                                              शैल सिंह



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

बे-हिस लगे ज़िन्दगी --

बे-हिस लगे ज़िन्दगी -- ऐ ज़िन्दगी बता तेरा इरादा क्या है  बे-नाम सी उदासी में भटकाने से फायदा क्या है  क्यों पुराने दयार में ले जाकर उलझा रह...