इश्क़ में तेरे फनकार बन करने लगी शायरी सनम

जो बिन बोले गुफ्त़गू कीं ऑंखों से ऑंखों ने सनम 
और तुम मुस्कुराये हर ज़ख्म का इलाज़ हो गया है ।

जब से तुझको नज़र भर कर देखी हैं ऑंखें सनम 
आशिकों की तरह आशिकाना मिज़ाज हो गया है  
इश्क़ में तेरे डूबी जिस्म से रूह में समा गये सनम 
दुनिया कहती है मेरा दीवानों सा अंदाज़ हो गया है ।

लग जायेगी नज़र होगी जब ख़बर जहां को सनम 
अब तो दिल भी तेरे इश्क़ का मोहताज हो गया है 
इश्क़ में तेरे फनकार बन करने लगी शायरी सनम 
मचल उठी लब पे ग़ज़ल मस्ताना साज़ हो गया है ।

तुम ही तुम सजने लगे ख्यालों ख़्वाबों में ऐ सनम 
बदला रंग ढंग चाल ढाल ख़ुद पर नाज़ हो गया है 
दिन हसीं रंगीन शामें लगने लगीं आजकल सनम 
उड़ रही मैं हवाओं में जबसे तूं सरताज हो गया है ।

शैल सिंह 
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