बुधवार, 2 सितंबर 2015

अफ़सोस ये भारत देश के वासी हैं

अफ़सोस ये भारत देश के वासी हैं 


हमारा देश ' कृषि प्रधान देश ' के नाम से
सबको मालूम,विश्व विख्यात है
इसी देश के नौनिहाल अन्न उत्पाद
कैसे होता अज्ञात हैं ,
अहाते की छोटी सी फुलवारी में
पिछवाड़े की छोटी सी क्यारी में
तड़ी पड़ी थी धान की
बेटी सयानी पूछी मम्मा ये कैसी घासें
हरी-हरी परिधान की
मैंने बोला जरई है ये
बोल रही क्या होता है ये 
मैंने बोला रोपनी होगी
बोली रोपनी क्या होता है
मैंने बोला धान की रोपाई होगी
बोली धान रोपाई क्या होता है
मैंने बोला शर्म करो तुम
राईस ब्रीडर की बेटी हो
इसी घास को खाकर सब
मटियामेट कर देती हो
कृषि प्रधान देश में रहती हो
केवल खाती पीती सोती हो
रोपाई का मौसम है
निहुर-निहुर रोप रही थीं मूल्यानी
खेत ले जाकर उसे दिखाया
देख ले खेती होती कैसे अज्ञानी
जिन्होंने पढ़ते-लिखते कॅरियर बुनते
गाँवों को कोसों पीछे छोड़ दिया
क्या जानेंगे नवयुग के आज के बच्चे
जिनने सब रिश्तों से मुँह मोड़ लिया
जिनने खोली शहर में ऑंखें
सुख वैभव की जिन्हें मिली विरासत
उत्पादन कितने चरणों से होके गुजरता 
क्या जाने ये लोग इनकी ऐसी नफ़ासत
बेटी की सहेली और उसकी माँ ,
इक बार मेरे घर आई थीं
कैम्पस में घुमा-घुमा कर
बेटी ने उन्हें भी फील्ड दिखाई थी
धान की कई प्रजाति की किस्में
चिन्हित के लिए स्टिक में टैग लगाकर
छोटी-छोटी क्यारियों में अलग-अलग
सलीके से रोपी गयी थीं रो में सजाकर
देख अचंभित हुईं थीं माँ-बेटी 
विस्मय से फटीं रह गई ऑंखें
कह बैठीं इस संस्थान में
कितने करीने से उगाई गई हैं घासें
और हठात कह बैठीं सुन पारो
इन घासों पर तूं नंगे पांव
सुबह शाम टहलाकर
पावर तेरा कम हो जायेगा 
चश्मा आँखों से उत्तर जायेगा
सुनकर हँसी मैं ठठाकर
बेटी बोली आंटी ये घास नहीं है धान है
ये संस्थान अनुसन्धान की खान है
यहाँ वैज्ञानिक करते इसी पर काम है
धान से ही निकलता चावल
चावल ही विश्व का मूल खाद्यान्न है
कुछ गाँछों में धान की देखीं बालियाँ
पहली बार हुआ था दिग्दर्शन
बोलीं क्या धान ऐसा होता है
क्या चावल इसका ही है परिवर्तन
पहली बार फसल से हुआ दीदार था
ऑंखें हुईं थीं देख विस्फारित
दऊरी,दुकान है जिनकी रोजी-रोटी
जिनका जीवन विजनेस पर आधारित
क्योंकि दोनों थीं मारवाड़ी
कहाँ होती है उनके खेती बाड़ी
अफ़सोस ये भारत देश के वासी हैं
कृषि प्रधान देश के निवासी है ।

मूल्यानी ---खेतों में काम करने वाले मजदूर
तड़ी ,जरई ----धान की नर्सरी
                                     
                                     शैल सिंह 

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