Sunday, 23 July 2017

कई दिनों की बारिश से आजिज होने पर


कई दिनों की बारिश से आजिज होने पर,

बन्द करो अब रोना बरखा रानी
बहुत हो गया जल बरसानी
भर गया कोना-कोना पानी ,

नाला उफन घर घुसने को आतुर,
जल भरे खेत लगें भयातुर,
रोमांचित बस मोर,पपिहा,दादुर ,

कितने दिन हो गए घर से निकले
पथ जम गई काई पग हैं फिसले
बन्द करो प्रलाप क्या दूं इसके बदले ,

कितने दिन हो गए सूरज दर्शन
तरसे धूप लिए मन मधुवन
कपड़े ओदे,घर भरा सीलन ,

रस्ता दलदल किचकिच कर दी
मक्खी, मच्छर से घर भर दी
गुमसाईन महके सब हद कर दी ,

जलावतन से बिलें भरीं यकायक
जीव घूम रहे खुलेआम भयानक
जाने कब क्या हो जाए अचानक ,

बहुत हो गई तेरी अति वृष्टि की
बरसो कहीं और जगहें भी सृष्टि की
काबिलियत दिखाओ ऐसी कृति की ।

                          शैल सिंह