Tuesday, 25 July 2017

सम्पूर्ण जगत में बस एक ही भगवान हैं

एक ही हैं भगवान मगर हैं नाम अनेकों गढ़े गए
नाम के चलते ही हृदय बहुत हैं विष भी भरे गए,

अरे प्रकट हो त्रिशूलधारी भटकों को समझाओ
परब्रम्हपरमेश्वर,एकाकार एक ही हम बतलाओ,

बाँटते तुझे निज स्वार्थ लिए विभिन्न धर्मों-पंन्थों में
अशांति मचा रखे दहशत फैला मुल्कों-मुल्कों में,

गर नहींं समझें अपना रौद्र ता्डव रूप दिखाओ
जिनके उत्पात से त्रस्त सभी गह के वज्र गिराओ,

बड़ा लिया तूने इम्तिहान और देखा खून खराबा
मची नाम पे तेरे मारकाट तूं बैठा है कौन दुवाबा,

आस्था पे तेरी हम मरते जो मांगें जन्नत का प्यार
बस राम मंदिर बनवा दे उनका प्राण हूरों पे वार ।

                                                 शैल सिंह