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मेरे भाव नदी का उमड़ता सोता

  मेरे भाव नदी का उमड़ता सोता -  जुलाई 03, 2026 ऐ कविता शब्दों की तह में  मेरे सारे दर्द छुपा लेना , जब अंतस् का भाव जगे और हृदय आकुल हो जाये  भींच अंक में सकल वेदना  पंख पे कलम बिठा लेना  ऐ कविता शब्दों की तह में  मेरे सारे दर्द छुपा लेना , भर जाये कोरी छाती जब मुझको बस इतना दे देना काग़ज़ का थोड़ा सा कोना प्रिय मेरे लिए बचा लेना  ऐ कविता शब्दों की तह में  मेरे सारे दर्द छुपा लेना , जब पीड़ा वश से बाहर हो  और उसे मैं भूल ना पाऊँ  जिसे बाँट सके ना कोई अपना तब भागीदार बना लेना ऐ कविता शब्दों की तह में  मेरे सारे दर्द छुपा लेना , भीगे दामन में इतना ऋण देना  शब्दों की ऊर्जा बाढ़ रोक ले मन का मीत मैं तुझमें ढूँढूँ अपनी प्रेयसी मुझे बना लेना ऐ कविता शब्दों की तह में  मेरे सारे दर्द छुपा लेना , सहना मुश्किल हो जाये जब  और मैं शिथिल विकल हो जाऊँ  जीवन से उकता जाऊँ जब जीने की राह दिखा देना  ऐ कविता शब्दों की तह में  मेरे सारे दर्द छिपा लेना , प्यार भरी अतलांत नदी में  मन पलाश जब डूबना चाहे ऐ कविता मेर...