शीशे सा टूट बिखर नहीं जाऊं कहीं
मेरा दर्द नज़र ना आए किसी को
मुस्कान अधरों पे बिछाये रखती हूॅं ।
दिल रोये असर ना दिखे किसी को
आनन पर सिंगार सजाये रखती हूॅं ।
जो आंखों में भरा है पानी लबालब
कहीं छलक पड़े ना दबाये रखती हूं ।
शीशे सा टूट बिखर नहीं जाऊं कहीं
ख़ुद को दृढ़ सशक्त बनाये रखती हूॅं ।
शैल सिंह
सर्वाधिकार सुरक्षित
दर्द सदा के लिए मिट जाए, दिल सदा हँसता रहे, नयनों में ख़ुशी के अश्रु हों और चट्टान सी बन जायें तो कैसा रहेगा ?
जवाब देंहटाएंयही तो बात है, आभार आपका
हटाएंबहुत सुंदर।
जवाब देंहटाएंधन्यवाद आपको
हटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंधन्यवाद सर
हटाएं