Monday, 28 August 2017

कविता " ढोंगी बाबाओं पर व्यंग्य "

आओ बच्चों तुम्हें सिखाएं,
सम्पत्ति अर्जित करने के नायाब तरीके,

झऊवा जैसे बाल बढ़ा लेना,
छुट्टे बकरे के पूंछ सी झबरी दाढ़ी
राम-रहीम का तमग़ा लटका
खूब लीला करना बन के मदारी
देखना सारी जागीर लुटा देंगे
तेरे अनुयायी जर,जोरू,जमींदारी
बहन,बेटियों के अस्मत की भी
बाट लगा देंगे तेरे अंधभक्त ये बन्दे
साध्वियों,सन्यासिनियों पर डोरे डालना
ले लेना दो चार दस पंगे
कोई आवाज बुलन्द करेगा गर ख़िलाफ़
मुर्ख अशिक्षित लेकर लाठी डन्डे
विरोधियों,प्रशासन पर वानर सेना सा
पिल पड़ेंगे तेरे पाले ये पागल गुंडे
नागिन डांस करेंगे तेरे लिए अंधभक्त ये ,
डाल कर खुली आँखों पर पर्दे
सम्पत्तियों को तहस-नहस कर
प्रशासन के विरुद्ध रोष जताएंगे
भक्ति के मद में डूबे ओ नकली ढोंगी 
तेरे लिए मौत को भी गले लगाएंगे
नपुंसक बनाना सबसे पहले
अपने सेवकों और सेवादारों को
हैसियत और रुतबे की धौंस दिखा
धमकाकर रखना भक्त परिवारों को
खुद को ईश्वर का साक्षात् अवतार बता
छकके कुकर्मों से मस्त बनाना अंधियारों को   

आओ बच्चों तुम्हें सिखाएं,
सम्पत्ति अर्जित करने के नायाब तरीके

मन में मक्कारी बगल कटारी वाला
बन जाना नकली बाबा कारोबारी
ऐशगाह की हर रात रंगीन बनाना
द्वार बैठा इक स्वामिभक्त दरबारी
जोकर,बहुरुपिये सा तन लिबास सजा
बिछाना भड़ुवाई का मायाजाल
भक्तों पर लम्पट प्रवचनों की बौछार कर
धुऑंधार,मचाना खूब धमाल
ब्रह्मचारी का चोला पेन्हकर
लोगों को मुर्ख बना धूल झोंकना आँखों में
फिर जो होगा देखा जायेगा उल्लू सीधा करना
उलझाए मूर्खों को रखना बातों में
जादू से जल में पूड़ी तलना
अपनाना जितने भी हों ढोंगी हथकण्डे
लाखों करोड़ों भींड़ को खूब भरमाना
कि फेल हों असली पूजारी पण्डे
ईश्वर सजा मुकर्रर तभी करेगा
जब पाप का घड़ा आकण्ठ भर जायेगा
फिर जेल में तब तक चक्की पिसना जब-तक 
उम्र और ऐश का रसिक मिजाज ढल जाएगा
दादागिरी फुस्स,फिसड्डी बनकर
मौत के दिन गिनना सलाखों के पीछे
गवाहों के बयानात खुलेंगी पोल पट्टियाँ
कैसे-कैसे खूब चलाते थे काले धन्धे 
साथ चेले चपाटी भीड़ ना होगी
बूरे वक्त में जपना हर-हर गंगे।

                                     शैल सिंह