Sunday, 27 November 2016

ख़िजाँ में फूल खिले ऐसा किया है दंगा

ख़िजाँ में फूल खिले ऐसा किया है दंगा


सबके साथ सबके विकास का
सुर में सुर मिला चलने का
ना खाऊँगा ना खाने दूँगा
इस तर्ज़ पर आगे बढ़ते रहने का ,

उसने वीणा उठा लिया है
समूचा भारतवर्ष  बदलने  का
जन-जन से आह्वान किया है
साथ-साथ संग चलने  का ,

दृढ़ संकल्प है उसने ठान लिया
घर-घर नया सवेरा लाने को
मन को जिद पर अड़ा लिया है
घना अँधियारा दूर भगाने को  ,

वर्षों से कोने-कोने विष जो
वातावरण में घुला हुआ था
जिन संग हवाओं का दल भी
आकण्ठों  डूबा  हुआ  था ,

इक देशभक्त फकीर दीवाना
चला है इन विषधरों से टकराने
क़दमों में परिवर्तन का निश्चय ले
कंकरों ,पत्थरों को पिघलाने ,

उलझा चल रहा काँटों से दामन
काँटे भी पग उसके चूमने लगे हैं
सत्तर सालों का मंजर देखीं ऑंखें
नये भारत के सपने बुनने लगे हैं ,

कद्रदान अनेकों इस सच्चे हीरे के
बड़े-बड़े धुरंधर हाथ मिलाने लगे हैं
उसके हर फ़ैसले की कर सराहना
देश के नागरिक सभी मुस्काने लगे हैं ,

इक प्रण उसने है हठ से लहराया
जड़ से समूल भ्रष्टाचार मिटाने का
कूटनीतिक हाथ मिला सूरज से
लक्ष्यों को मंजिल तक ले जाने का ,

बेशकीमती मोती पहचानो
अरे सुनो ओ देशद्रोहियों गद्दारों
जनमानस के तख़्त का शहंशाह वो
विष वमन करो या तुम फुफ़कारो ,

युग स्वर्णिम होगा आने वाला
इसी कद्दावर महापुरुष के हाथों
इस वैरागी के जीवन का सपना मात्र
विश्व हिन्द को देखे भर-भर आँखों,

देश लिए यह बहुमूल्य शख़्स है
ऐसे धरोहर को संजोये रखना है
इस युगान्तकारी कर्मवीर का
आत्मबल देश वालों बनाये रखना है

धैर्य,सहयोग,समर्पण की अलख
हम सबको मिल के जगानी होंगी
अभी,जो झेल रहे हम सब परेशानी
उसका निकलेगा नतीजा भी दूरगामी ,

आपके बलबूते ही इस जीवट ने
भृष्टाचारियों से लिया है पंगा
मत छोड़ना शीर्ष पर उसे अकेला
ख़िजाँ में फूल खिले ऐसा किया है दंगा ,

मत करो सियासत सस्ती घटिया
विरोध के लिए विरोधी तेवरों          
देखो नज़र उठा भविष्य देश का
गन्दी राजनीति से ऊपर उठो बेवड़ों ,

देख वजूद हाशिये परअपना
दिन-रात पप्पू फेंकर रहा है
मोदी मारक अचूक अस्त्र-शस्त्र
ममता की आँतें कुतर रहा है ,

गजगामिनी जी अवसाद में
पूर्जा-पूर्जा साईकिल का कोमा में
मस्तिष्क दिवालिया हुआ 'आपका'
भूक-भूक लालटेन कराहे कोना में ,

इक पारदर्शी कर्मठ,कर्तव्यनिष्ठ योगी के
नेक इरादे,क्षमताएं गौर से कौशल देखो
आतंक पोषितों,भ्रष्ट नेताओं,माफियाओं के
गढ़ मची क्यों घमासान हलचल,दंगल देखो ,

देश की मजबूत बुनियाद लिए ही उसने
नोटबंदी जैसा जटिल अहम् कदम उठाया है
क्यों विपक्षी राजनीतिक गलियारों में ही
उसके अप्रत्याशित फैसले पे सियापा छाया है ,

हम भारतवंशियों को गर्व आज यह
कि नमो-नमो जी जैसा रतन मिला है
हर मर्ज का उनके पास इलाज है,इस
सर्जन के ऑपरेशन से नहीं कोई गिला है

विपक्षी,विद्रोही खेमों में हो रहा रिएक्शन
जनता हर ऐक्शन का अनुमोदन करती है
अर्थक्रान्ति के उसके साहसिक प्रस्ताव पर
बच्चा,बूढ़ा,जवान हर गली समर्थन करती है ।

  जय हिन्द ,जय भारत ,जय मोदी ।

                                  शैल सिंह