Friday, 31 August 2012

      मेरी रचना --भारत फिर से विश्व के मानस पटल पर एक अलग पहचान बना रहा है \                            


' हम हैं विश्व गुरु'

हो चाँद हमारी मुट्ठी में है करना सूरज भी बस में 
उच्च शिखर से सागर तक हम चमकें सारे जग में ।
शांति,अमन के हम प्रहरी तुम्हें उत्पात मचाना बस आता 
जब होगी खुश्बू आम हमारी करनी पर होगा तूं पछताता ।
हम बेजां वक्त गंवाते ही नहीं बेहूदा हरकत कर-कर के 
करना मुकाबला तो आओं पथ विकास के चल कर के ।
भगवान मेरा मस्जिद बसता अल्ला रहता मन्दिर में तेरा 
हम सुनें अजान मस्जिद की आरती सुन मन्दिर का मेरा ।
हम चन्दन हैं महक फिजां में बिखर रही दिन-प्रतिदिन 
यदि देते लोबान का सोंधापन आकंठ  लगाते निशदिन ।
चाँद पे होगा घर अपना करेगा सूरज मेहमाननवाजी 
हो शतरंज की चाहे जो बिसात जीतेंगे हम हर बाजी ।
जल,वायु,अवनि,अम्बर अपना सपना हमसे ही ज़माना हो 
हम नहीं ज़माने से यारों जग सारा हम पर ही दीवाना हो ।
हमसे रौशन क्षितिज हमारे परचम को नस्तक विश्व करेगा 
कभी गौरव की बुनियाद ढ़हाया जो पानी आके यहाँ भरेगा ।
विश्व पटल पर उभर रहे हम नव युग की लाली बनकर 
तरल,विनम्र है मन लेकिन तन कठोर श्रम बुद्धि बल पर ।
समय चक्र मेहरबां हमपे दुनियाँ का संचालन हमीं करेंगे 
नित विकास के नव डगर अग्रसर माध्यम भी हमीं बनेंगे ।
हमको दुनियाँ से होड़ लगानी सबसे आगे होंगे हिन्दुस्तानी
दुनियाँ से लोहा मनवाना नहीं जग में हम सा है कोई सानी ।
पहलू में तारे आसमान के ध्वज शान से अन्तरिक्ष लहराएगा 
विश्व गुरु का सर ताज चढ़ा जग जय भारत जय गायेगा ।