Tuesday, 27 March 2018

" अम्बेडकर का संविधान बदल देखिए "

आरक्षण पर कविता , मोदी जी से निवेदन करती हुई

हो चुकी मियाद खतम दखल दीजिए
सभी के अरज पर भी अमल कीजिए
नोटबंदी,जीएसटी के मानिंद माननीय
कमर कसके इक और करम कीजिए ।

आरक्षण के कोढ़ से हो मुक्त देश मेरा
इस दीमक से होता खोखला देश तेरा
मेहनतकश नस्लों पे भी रहम कीजिए
हो चुकी मियाद खतम दखल दीजिए ।

आरक्षण के हवनकुण्ड चढ़ीं प्रतिभायें
आर्थिक आधार पे हों चयन प्रक्रियायें
नये अभियान को अब सफल कीजिए
हो चुकी मियाद खतम दखल दीजिए ।

तपती योग्यतायें इस मियादी बुखार में
झुलसें बुद्धिजीवी आरक्षण के अंगार में
महोदय उपचार का शीघ्र पहल कीजिए
हो चुकी मियाद खतम दखल दीजिए ।

बढ़ते अपराध क्यों तह तक तो जाईए
आरक्षण हटाकर इक बार आजमाईए
अविलंब ऐसी महामारी का हल ढूंढिए
हो चुकी मियाद खतम दखल दीजिए ।

प्रतिभावों संग होता ये अन्याय रोकिए
हौसलों के पंख न कतर करके फेंकिए
अम्बेडकर का संविधान बदल देखिए
हो चुकी मियाद खतम दखल दीजिए ।

कहर आन्दोलन का असहनीय होगा
उम्मीदों पर उतरना अवर्णनीय होगा
जायज है मांग हमारी बिगुल फूंकिए
हो चुकी मियाद खतम दखल दीजिए ।

                         शैल सिंह