Tuesday, 28 March 2017

अहोभाग्य उत्तर प्रदेश का

मेरी कविता

अब मेरे प्रदेश का होगा उन्नयन
फूल खिला जन-मन के उपवन ,

इक संत की हुई ताज़पोशी
कितनी हनक,धमक के साथ
अहोभाग्य उत्तर प्रदेश का
जनमत ने रच डाला इतिहास ,

हाथी का मद चूर हुआ
चारों खाने चित पड़ी निढाल
खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे
ईवीएम को बना के रोष की ढाल ,

घोंचू पंजा ने साईकिल का
कितना बुरा कर दिया हाल
इतनी गहरी खाई में ढकेला
उलटा दिया बिसात का जाल ,

खतरे में अस्तित्व झाड़ू का
खुजलीवाल से खा के खार
इक-इक सींका बिखर रहा
रामा क्या होगा अगली बार ,

लालटेन मत चहको इतना
इस बार की आंधी नहीं बख़्शेगी
बाती पे रखना कस के लग़ाम [ ज़ुबान पे ]
जनाधार की कैंची ही कतरेगी

राष्ट्रवादी ताक़तों से टकरा
चहुंदिशा की गईं हवाएं हार
गले लिपट गईं आकर सहर्ष
योगी जी के बन फूलों का हार ,

जो साहूकार बन लूट रहे थे
खूब अपने ही घर का माल
उनकी अकल ठिकाने लगा दिए
उनके अपने ही सियासी चाल ,

कितने दिन और अँधेरों में रखते
साम्प्रदायिकता का छ्द्म पाठ पढ़ा के
ऐसा जड़ा तमाचा बड़बोले गालों पर
जनता ने गढ़-गढ़ पत्ता साफ़ करा के ,

वर्षों से डराकर जिन भौकालों से
स्वार्थियों ने जाति-धर्म का किया व्यापर
आज़ योगी,मोदी जी के क़द्रदानों ने
उन्हें धूल चटा दी ऐसी बही बयार ।

                                      शैल सिंह