Monday, 4 August 2014

चाँदनी सी शीतलता


चाँदनी सी शीतलता


चाँदनी सी शीतलता जब मन ना घुली
तो चाँद पर पहुँच जाने से क्या फ़ायदा ,

मानवता ने मानवता जब छुआ नहीं
खुद महानता दर्शाने से क्या फ़ायदा ,

दिल को आहत करे जो हर लफ्ज़ से
उसे महात्मा बन जाने से क्या फ़ायदा ,

छोटे-बड़ों का आदर सम्मान ही नहीं
तो उसके धनवान होने से क्या फ़ायदा ,

जो हाथ ग़ुरबत में भी देना सीखा सदा
गुर धनवान ना सीखा तो क्या फ़ायदा ,

खुद के लिए जीते करते हैं संग्रह सभी
किया जग के लिए ना तो क्या फ़ायदा ,

क्यों झुकी रहती है डाली फलों से लदी
मगरूर ओहदा न जाने तो क्या फ़ायदा ,

सुख समाये ना जिसमें हर ख़ुशी के लिए
माल,दौलत और शोहरत से क्या फ़ायदा ,

दिल दुखे ना जिसका दीन दुःखी के लिए
भला धर्म,कर्म,दान,पुण्य से क्या फ़ायदा ।
ग़ुरबत--ग़रीबी
                                           शैल सिंह