Friday, 14 March 2014

''क्या दिलकशीं में हाल''

                                      

   ''क्या दिलकशीं में हाल''    


उमंग ले गए तुम तरंग ले गए 
जिंदगी के रंग सारे संग ले गए 

गुजरे हुए लम्हात की हर बात याद आये 
वादे जो जज्वात के अल्फाज गुदगुदाए 
भींगे प्यार में दो जिस्म वो बरसात याद आये 
गीत ले गए तुम संगीत ले गए 
ग़ज़ल की रूबाई भी मनमीत ले गए ,

बदले वफा के तुमने जो बख्शीश दी है शुक्रिया 
रंजोगम नहीं हैरान हूँ बस बेरुखी पे शुक्रिया   
जीस्त वास्ते जली जो चन्दन की चिता शुक्रिया  
जान ले गए तुम जहान ले गए 
ईमान बेच क़ीमती मुसकान ले गए ,

मायूसियों की राह में दीपक जलाये बैठी 
खिले हसरतों के फूल जो दिल में दबाये बैठी 
आँख आओगे जिस राह रोज़ोशब लगाये बैठी 
साज़ ले गए तुम आवाज़ ले गए 
अदा नाज़ ले गए तुम अंदाज़ ले गए ,

जीवन के वियाबानों में रुदादे-गमों के सिवा    
कुछ नहीं नाला कशीं के पास मेरे मासिवा     
चन्द्रमुखी शाम में बस गम के पहाड़ों के सिवा 
आस ले गए तुम उम्मीद ले गए 
करार चैन भी संग नींद ले गए , 

यादों के बेतलब ना झरोखों में झाँकिए 
क्या दिलकशीं में हाल जरा आके आंकिए 
बावफ़ा दी जो सौग़ात दर्दे ग़म बांटिये
हँसी ले गए तुम ख़ुशी ले गए
उम्र भर की बेबसी ख़ामशी दे गए ,

जीस्त -जीवन ,  रोज़ोशब-दिन रात
नाला कशीं - हाय हाय ,रुदादे-गमों - दुःखड़ा 
मासिवा -अतिरिक्त                                            शैल सिंह