Friday, 14 March 2014

होली पर्व पर एक संदेश

        होली पर्व पर एक संदेश 

वसंत ऋतुराज का आगमन 
नवीन प्रकृति में परिवर्तन 
भंवरे फूलों पर मंडराने लगे 
नये फूल पत्ते वृक्षों पर आने लगे ,

उमड़ी मादक सी अंगड़ाई 
हर दिल रौनक छितराई 
वसंतोत्सव की नेह बहार 
मुरझाये मन को दी उपहार , 
आया होली का त्यौहार 
बहे भीनी फागुनी बयार 
रंगे हम रंगों के फूहार में 
भींगे मन से मन के प्यार में ,

त्यागें मद झूठे अहंकार, 
वर्ण,जातिभेद ,तिरष्कार 
ये समरसता का त्यौहार 
हास-परिहास का त्यौहार ,

आनंद,उल्लास का त्यौहार 
व्यंग्य,विनोद का त्यौहार 
शत्रुता,द्वेष भूलें सब विकार  
ये एकता,मित्रता का त्यौहार ,


देश,समाज की सभी बुराई, 
होलिका दहन में करें विसर्जित 
सतरंगी मधुराई बरसाकर हम  
करें लें सारी खुशियां अर्जित , 

भूलें आपसी कलह तकरार 
करें भष्म,ईर्ष्या ,अहंकार 
आओ करें आत्म परिष्कार 
तोड़ें नफरत की सब दीवार ,

होली बहुरंगों का त्यौहार 
हर्ष,उमंगों का त्यौहार 
सभी जाति धर्मों का त्यौहार 
रंगें प्रेम रंगों में मन के तार । 
                      'शैल सिंह'