ज़िन्दगी भर रहा मलाल इसी बात का मुझे
अपना चेहरा मेरे ख़्वाबों में सजाया ना करो ।
तुम्हारी यादों में भूली ज़माना और ख़ुद को
तेरे सिवा ना अपनाया अभी तक किसी को
ज़िन्दगी भर रहा मलाल इसी बात का मुझे
कितना चाहा तुझे था बता न पाई तुम्हीं को
सिरफिरा इस क़दर याद में बनाया ना करो
अपना चेहरा मेरे ख़्वाबों में सजाया ना करो ।
भले ही रह गयी हो अधूरी मेरी चाहत मगर
तूं दूर रह कर भी है पास मेरे हर वक़्त मगर
अधूरा रह कर भी रिश्ता ये खतम हुआ नहीं
दिल को देते सुकूं ढेरों यादों के दरख़्त मगर
मन के मुँडेरों पर चाँद बन के आया ना करो
अपना चेहरा मेरे ख़्वाबों में सजाया ना करो ।
कितना समझाते हैं दिल को भूल जाये तुझे
तुम मेरी क़िस्मत में थे नहीं बतलाये भी उसे
उसने नई दुनिया बसा ली कहा कितनी बार
कहता बढ़ती जाये याद कैसे भूल जायें उसे
अतीत की वादियों में मन भटकाया ना करो
अपना चेहरा मेरे ख़्वाबों में सजाया ना करो ।
शैल सिंह
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जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 18 फरवरी 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!