Monday, 19 September 2016

'' हिन्दी दिवस पर '' हिन्दी आत्मा है हिंदुस्तान की

            अभी हिंदी पखवाड़ा चल रहा है उस उपलक्ष्य में मेरी मेरे द्वारा लिखी यह कविता है 

                      हिन्दी दिवस पर बस यही कहना है ---

                       '' हिन्दी आत्मा है हिंदुस्तान की
                          इसे सभी लोग दिल से अपनाएं
                          इससे अच्छी भाषा न कोई जहान की
                          हम इसे जेहन में जिंदगी में उतारें ''

हिन्दी धड़कन,मेरुदण्ड,सांस है शिरोमणि अखण्ड हिंदुस्तान की
हर माने में समर्थवान वृहत कोषों का भण्डार हिंदी हिंदुस्तान की,

स्वर,व्यंजन,छन्दों से सुशोभित सुघड़,सलोनी हिदी हिंदुस्तान की
सहज,सरल,सुबोध,शुद्ध अलंकारयुक्त शुचि भाषा हिंदी ज्ञान की,

गीत रचे संगीत रचे रस श्रृंगार में परोसे दुःख दर्द कहानी,कविता
गजल,कलाम शेरो-शायरी में कर देती अंतर की प्रवाहित सरिता,

खोल तिजोरी अतुल शब्द समन्वय की अविरल रसधार बहाती है
सौंदर्यबोध की मलिका हिंदी लगाके बिंदी भव्य अलख जगाती है,

गर्व से बोलो,शर्म करो मत राष्ट्रधर्म निभाओ भाषा स्वाभिमान की
संसार की सबसे उन्नत औ सुव्यस्थित अग्रणी भाषा हिंदुस्तान की,

मर्यादित,सुस्पष्ट,प्रभावी मधुर भी कितनी जनहित के कल्याण की
संवादमुखी,पारदर्शी संग सर्वसुलभ,सर्वव्यापी हिंदी हिंदुस्तान की,

आचार-विचार,व्यवहार में घुलती हिंदी भाषा देश लिए उत्थान की
सर्वसमय सर्वत्र प्रयोग अभिव्यक्ति की मैत्री है हिंदी हिंदुस्तान की,

मीठी सरस,सुहावन हिंदी भावों की जननी जन-जन के जुबान की
सद्दभाव,सौहार्द की कड़ी,समृद्ध करें हिंदी विश्व गुरु अभियान की,

अकूत साहित्य सम्पदा हिंदी की शुद्ध परिष्कृत ओजस्वी शान की
सहर्ष सुकीर्ति,ख्याति फैलायें राष्ट्रीय चेतना हिंदी आत्म सम्मान की,

चिरंतनकाल से देवों की वाणी सनातनी है हिंदी धर्म वेद पुराण की
संस्कारवान,शालीन,सौम्य रससिक्त मृदु भाषा हिंदी हिंदुस्तान की,

जिन्हें कदर नहीं अमृत भाषा की जो अज्ञान के अन्धकार में डूबे हैं
जिन्हें हिंदी बोलने में शर्म संकोच महिमा का भान नहीं वे अजूबे हैं,

राष्ट्रभाषा है हिंदी हमारी सगर्व बोलो जय बोलो हिंदी हिंदुस्तान की
जोर से बोलो,मिलके बोलो,सारे बोलो हम हिन्दू हिंदी हिंदुस्तान की ।

                                                                          शैल सिंह