Friday, 29 July 2016

अभिव्यक्ति की आजादी है इसीलिए अभिव्यक्त किया है


अभिव्यक्ति की आजादी है इसीलिए अभिव्यक्त किया 

हम चाँद पे झंडा फहरायेंगे क्षितिज का चाँद हमारा है
देख तीन रंगों के बीच चक्र अभिप्राय बड़ा ही प्यारा है ,

तूं झंडे पे चाँद के चित्र बना ध्यान रहे आधा अधूरा हो
आधे चाँद के बीच सजा बस एक ही टंका सितारा हो  ,

हवा नीर सब अपने सूरज पर भी अधिकार हमारा है
आस्मा सहित चाँद के जुगनूँ तारे सबपे राज हमारा है ,

जल जमजम का पीकर भी तेरे मन का सोता खारा है
यहाँ हर मन के सोते से फूटती पावन गंगा की धारा है ,

अपराध की फ़ेहरिस्तों से गदगद होता ख़ुदा तुम्हारा है
सद्गगुण सुमार्ग सत्कर्म से अभिभूत होता नाथ हमारा है ।

                                                 शैल सिंह