Wednesday, 29 June 2016

तुम याद बहुत आए

जब-जब कोकिल ने गान सुनाए
और चटक चांदनी उतरी आँगन 
जब-जब रंग बिखेरा इन्द्रधनुष ने
और जब आया पतझड़ में सावन 
         तब-तब प्रियतम तुम याद बहुत आए ,

जब-जब जग ने तंज कसा मुझपे 
मन के सन्तापों पर किया प्रहार 
माथे की शिकन पर गौर ना कर 
दुःखती रेखाओं को दिया झंकार 
         तब-तब प्रियतम तुम याद बहुत आए ,

उन्मद यौवन की प्यासी आँखों ने
कभी उर में तेरा अक्स उतारा था
ख्वामखाह हुई बदनाम निगोड़ी रे
जब देख के चढ़ा जग का पारा था
        तब-तब प्रियतम तुम याद बहुत आए ,

हर जीवन की होती एक कहानी
किसी के छंट जाते बादल बेपरवा
जबकि यहाँ धुला दूध का ना कोई
जब आईना मुझको दिखाया गया
        तब-तब प्रियतम तुम याद बहुत आए ,

जब-जब दामन पर कीच उछला
मेरे  पाप-पुण्यों  पर उठा  सवाल
औरों की करतूतें तो गुमनाम रहीं
जब मन के ठोकर पर मचा बवाल
         तब-तब प्रियतम तुम याद बहुत आए ।

                                         शैल सिंह