Monday, 29 May 2017

एक छोटी सी गजल

ऐ हवा ला कभी उनके घर की ख़बर
जबसे मिल के गए न मुड़के देखा इधर
जा पता पूछ कर आ बता कुछ इधर
क्यों बदल सी गई हमसफ़र की नजर |

ऐ बहारों कभी मेरे दर से भी गुजर
देख जा आके कैसी खिजां मैं है शज़र
जिसकी हर शाख़ पे वो मचाये ग़दर
हो गए बेखबर क्यूँ आजकल इस कदर ।
                                      शैल सिंह