Friday, 30 September 2016

'' क्रन्तिकारी कविता '' शत-शत नमन तुम्हें महानायकों

ये वानगी तो एक चेतावनी थी
सिंधु जल पर जल्द फैसला लेंगे हम ,

दिल आज ख़ुशी से पागल है
मन रही देश में गली-गली दीवाली  
शहर-नगर फूटे धांय-धांय पटाखे
मिष्ठानों से घर-घर सज गई थाली ,

उरी की घटना ने ले लिया इंतक़ाम
फैली मातमी चेहरों पर ख़ुशहाली
बहादुरों ने ऐसा साहसी रंग बिखेरा
अबीर गुलाल उड़ा होली पर्व मना ली ,

शत-शत नमन तुम्हें महानायकों
रच दी एल ओ सी पे नई कहानी
प्रण किया था खा के माँ की कसम
व्यर्थ न जाने दी सेनानी की क़ुरबानी ,

एक-एक शहादत के बदले तेवर ने
दस-दस जां लेने की बात कही थी
अभी मिशन नहीं पूरा हुआ बता दो
पीठ पे हमने घात की वार सही थी

आज कलेजे को मिली है ठण्डक
उरी का मुँहतोड़ जवाब दे देने पर
घर में घुस वीरों ने जो अंजाम दिया
अब नहीं मलाल सुपुत्रों के खोने पर

तेरे शौर्य का अद्द्भुत परचम देख
हल्दीघाटी का भी सीना फूल गया
परमाणु बमो की धमकी देने वाला
शिकश्त खा लाशें गिनना भूल गया।

                                       शैल सिंह