Friday, 20 May 2016

मृत आत्मा में फूंकनी अँगड़ाईयाँ तुम्हें


" देश के नौजवानों के लिए मेरी ये जोशीली कविता " 


जागो  नौजवानों  देश के,अबेर न  हो जाये
भरके जोश-ज़िस्म खूने-जुनूँ देर न हो जाये ,

देर   न    हो    जाये   कहीं    देर   न  जाये
खेत चुग जायें चिरईयां  हाथ बटेर रह जाये ,

देखो स्वप्न अखण्ड देश के,सवेर न हो जाये
भर  शिरा   में   गर्म  लहू   देर  न  हो  जाये ,

देर   न    हो   जाये    कहीं    देर   न  जाये
खेत चुग जायें  चिरईयां हाथ बटेर रह जाये ,

कहीं  लग  न  जाये आग  घर  के चराग़ से
खा  न  जाएँ  मात जयचन्दों  के  जमात से
वहशी आँधियाँ बहा न लें अपने मिज़ाज से ,

जागो नौजवानों  देश  के,अबेर न  हो जाये
भरके जोश-ज़िस्म खूने-जुनूँ  देर न हो जाये ,

मृत  आत्मा  में   फूंकनी  अँगड़ाईयाँ  तुम्हें
अभी  विश्व की भी मापनी  गहराईयां  तुम्हें
छूनी उड़ के आसमा  की   ऊँचाईयाँ   तुम्हें ,

जागो  नौजवानों  देश के,अबेर न  हो जाये
भरके जोश-ज़िस्म खूने-जुनूँ देर न हो जाये ,

तुम्हें   गगन  को   भेदना   चट्टान    छेदना
विकराल  हवा  बनकर  शोलों  से  खेलना
वक्त दुश्मनों की माद में ताकत है झोंकना ,

जागो  नौजवानों  देश के,अबेर न  हो जाये
भरके जोश-ज़िस्म खूने-जुनूँ देर न हो जाये ,

वश में हो  सूरज जगा  जन-जन  में  हौसला
फौलादी  सीना  देख  दुश्मन  जाएं  बौखला
जमीं  से  पाताल  का तय करना  है फासला ,

जागो   नौजवानों  देश के,अबेर न   हो जाये
भरके जोश-ज़िस्म  खूने-जुनूँ देर न हो  जाये ,

शांतिवाद का हम पाठ पढ़ बलिदान बस हुए
छाती  पे  मूंग   दल - दल  हैवान   सब   हुए
अस्त्र   हाथ  में  उठा जला  उत्थान  के  दीये ,

जागो  नौजवानों   देश के, अबेर  न  हो  जाये
भरके  जोश-ज़िस्म  खूने-जुनूँ  देर न हो  जाये ,

रुकने   न    पाए  कारवां  कभी  तूफान   का
जलता रहे सतत मशाल दिल में अभियान का
कहीं आँधियाँ न रोक लें राह ऊँची  उड़ान  का ,

जागो  नौजवानों  देश  के, अबेर  न  हो  जाये
भरके  जोश-ज़िस्म  खूने-जुनूँ देर न  हो  जाये ।

                                             शैल सिंह