Friday, 11 March 2016

'' एक देश भक्त की आवाज़ ''


   
        




चमक गए हो ज़मीं से फ़लक़ तक
मत इस गफलत में रहना कन्हैया ,

ये जो तेरा बढ़ा हौसला है थोड़े मज़मा ,हुजूमों के बल 
अगर फ़लक़ से गिरोगे ज़मीं पर बोलो किधर जाओगे 
ये चटखारे ले जो भाड़ मंडली सुन रही आज तुमको 
कल जब सिरे से करेगी छीछालेदर बोलो किधर जाओगे 
तूने आस्मां में छेद करने की ऐसी हिमाक़त जो की है 
जब ये तेरी जिंदगी पर बन आएगी बोलो किधर जाओगे 
जिन तमाशबीनों के बीच तीसमार खाँ बने फिर रहे तुम 
जब ये पलट तुझपर कीचड़ उछालेंगे बोलो किधर जाओगे 
कभी ना कभी तो इन्हें भी भारत माँ का कर्तव्य बोध होगा 
जब जमीर इनका भी जाग जायेगा बोलो किधर जाओगे 
जिस माँ की अस्मिता संप्रभुता को तूने ललकारा है पगले 
उस जननी के महाकोप से बचकर बोलो किधर जाओगे 
वक्त अभी भी है बदल लो अपना नजरिया कन्हैया 
जब देशभक्तों के गुब्बार की बरसात होगी बोलो किधर जाओगे 
येचुरी,केजरी ,पप्पू,नितीश कुछ क़ाफिरों संग उछालें न मारो 
जब गेंद के मानिंद उछालेगी जनता जनार्दन बोलो किधर जाओगे 
तूने अवमानना की है न्यायिक हिदायतों की अनदेखी कर 
फिर किसी अधिवक्ता का तुझपे कहर गर टूटा बोलो किधर जाओगे 
इक मौका मिला था तुझे संभलने और जुबान संभालने का ज़ाहिल 
तुम तो और भी सनक गए राँची जाओगे या आगरा बोलो किधर जाओगे । 

                                       '' एक देश भक्त ''    शैल सिंह