Thursday, 11 February 2016

'' लयवद्ध गीत मादक वसंत पर ''


'' ठेठ भोजपुरी में वसन्त की महिमा का साक्षात् वर्णन ''

                             '' लयवद्ध गीत मादक वसंत पर '' 

करें बाग़ बगईचा सिंगार
सुदिनवां वसन्त ले अइले
खेतवा सेठानी लगे ओढ़ी धानी चुनरी 
परदेशी पीत सखी कंत घरे अइले ,

सुरमई साँझ लगे नववधू वसुधा
सूरजमुखी के बढ़ी गए बड़ा रुतबा
विलक्षण उपहार लेके अइले ऋतुराज
नवगंध,नवपल्लव,नवकुसुम,नवगात
हरी-भरी वादी में परकृति छेड़े सरगम
प्रणय निवेदन करि प्रेमी करें प्रहसन ,

सूखी-सूखी टहनी पे लदी गए पत्र दल 
अमुवा बऊराईल बउरि डार-डार 
मह-मह महके महुवा दिशा-दिशा 
निमिया फुलाईलि गहबर झार 
गुन-गुन भंवरा करेला गुंजार 
देखि-देखि गांछी-गांछी फुलवा के हार ,

उड़ेला विहंग देखा खुले आसमनवा
सेमल नारंगी रंग रंगवले वदनवां 
टेढ़े-मेढ़े ढाक तन फूटीं भूरि कलियाँ
लाल,नवरंग में देखावेलं जवानियाँ
कैथा कुरूप लीपले ऋतू के प्रसाधन
वनवा विटप लागे जईसे सुहागन ,

पाते-पाते डारि-डारि कूके कोइलरिया 
रास-रंग में मगन नाचे मोरवा चिरईया  
बगुला उजर घूमे खेत-खलिहान में 
पपीहा की पिया रट गूंजे है जहान में 
रतिया चंदनिया सजावेले दूकान 
बड़ा नीक लागे मधुऋतु के विहान ,

भइलीं उन्मादी कस तितली,बरैया
मधुमक्खी लूटी रस लेली बलैया
हरियर झबला में लाल ठोर सुअवा
उड़ि-उड़ि बइठेला मकई के मुड़वा
लह-लह फसल निरेखेला किसान
जागि के अगोरे खेत डालि के मचान ,

पित वसन धारि ठसके सरसोईया 
गेंहुँवा क बाली झूमे सनकल केरईया 
चनवा जवानी चढ़ल सहकेले जईया 
मकई से रेस में रहर मोरी दईया 
डोलिया सजावे लागल पुरुवा बयार 
काटे चिटुकी ठिठोली करे पछुवा छिनार ,

झपसी-झपसी लहरावे चूल मौलश्री 
दुवरा पर गमकेला हरसिंगार 
मेंहदी के पतवा से झहरेला ख़ुश्बू 
चरर-मरर गरे लग लचे बंसवार 
जले बुझे उड़े सांझि-राते भगजुगुनी 
बबुल जी शीशम के रेशम केश रिझलीं ,

कईसे कहीं लाज लागे कली कचनार
कांची उमर मुस्की बरछी कटार
मटके वातायन पेन्हि घघरा लहरिया
कसीदा काढ़ि रंग-बिरंग किनरिया
पीपरा के पात पर डोले पुरईनिया
सगरी जहान लगे नई दुलहिनिया ,

पोतल लिपल देखि घर के देवाल
सुघड़ रंगोली खांचल मनवां निहाल
गउँवा की देहिया ग़जब चित्रकारी
कचरी,बड़ी सूखे पापड़ अंगना दुवारी
मड़ई के माथ पर सवार लौकी,कोंहड़ा
तोरई ,भिंडी चिंचिढ़ा लगवले जमवड़ा ,

लरके लतर देखा सेमिया के भार से
पलकी चौराई हँसे ओसिया के प्यार से
मधुमासी जोबना सवति जस लागे
जले भूने लाल रंग मरचा पोता के
धनिया ग़दर करे झझके पोदिनवा
गोभीया कनखि मारे मातल बैगनवा ,

लाले अभरन में टमटर ढावेलीं गज़ब
करें मुरई अँइठी मूँछ खीरा से तलब
माछी बिछिलाय तरकरियन के अंग पर
खिसिया के तंज कसें कलरा के ढंग पर
बेसर अस लागे सहजन के झुलनियाँ
बीन ,बोड़ो नाक लटकवलीं नथनियाँ ,

सोनचंपा के भीना गंध करे है बेहाल
खोलें विहँसी घूँघट पट गेंदा गुलाब
सुगन्धराज देखें अंग दरपन संवार के
रंगन,टगर काकुल ज़ुल्फी में काढ़के
दिनवा बहुरले गईले भाग पतझार
गावें घट-घट हिली-मिली मंगलचार ,

जामुन सियावें लहंगा चोली छींटदार
कटहल ,बड़हल में भईल तक़रार
बेल,बईर,धतूरा के केतना रूआब बा
शिव रज चढ़ी मानो पवले सुराज बा
चंवर डोलवले ऋतुराज चहुँओर
छइलल नागफ़नी होईके विभोर ,

रातरानी झाँपि चलें अपनो अँचरवा
पगड़ी उछालें अढ़उलवा कनेरवा
चम्पा,चमेली,बेला हँसे ठट्ठा मारि के
फूटलीं किरिन मांग भरी के सेनुरवा
ओस में नहाके निखरे दूब ,घसिया
मकरन्द चूस मस्त भये केत्ते रसिया ,

कशिया के भुवा खुलल भईल मुँहजोर
जोर नाहीं चले उड़े मन का चकोर
कुसुमी चदरिया के तानि के ओहार
टह-टह टेसू बरसे फाग के फुहार
हरषित सुहासित भइल मादक जवार
बुढ़वन पर चढ़ल जवानी के बोखार ,

करें बाग़ बगईचा सिंगार
सुदिनवां वसन्त ले अइले
खेतवा सेठानी लगे ओढ़ी धानी चुनरी 
परदेशी पीत सखी कंत घरे अइले । 


                                     शैल सिंह