Sunday, 20 December 2015

'' इश्क़ क्या है ''

   '' इश्क़ क्या है ''

इश्क़ करना खता नहीं खता करवा देती है
बिना दुश्मनी के भी तलवार चलवा देती है
ज़ायज़ नाज़ायज़ इश्क अंधा करवा देती है
घर-परिवार से बग़ावत पर उतरवा देती है
ख़ुदा भी नज़र आता नहीं महबूब के सिवा
ज़माने की जखम से बेपरवा करवा देती है
इश्क़ तूफान सा बहता बेतरतीब दरिया है
इज्जत पे आंच आये हैवान बनवा देती है
इतिहास पलट के देखो इश्क़ के मतवालों
दुनिया दीवारों में ज़िंदा भी चुनवा देती है ।

                                        शैल सिंह