Friday, 16 May 2014

'वाह रे नमो-नमो'


प्रखर वक्ता कद्दावर कद वाला देश ने दिया है आज सिकंदर  

   हाथी का मद चूर हुआ साईकिल का पहिया हो गया पंक्चर 
   लालटेन की बाती गुल हो गयी थककर पंजा से रूठा मुक़द्दर 
   धनुष बिचारा गच्चा खाया झाड़ू को मंहगी पड़ गई टक्कर 
   कीचड़ में खिला कमल मुस्काये सबको करके रफू-चक्कर ।


   'वाह रे नमो-नमो' 

करिश्मा किया है मोदी के प्रचार ने कमाल 
विरोधियों के गढ़ में भी मचा दिया धमाल 
जीत के आंकड़े से जनता देश की निहाल 
वाह रे नमो-नमो फेल कर दी सबकी चाल । 

मुँह पे जड़ा ताला आलोचक हुए निढाल 
इक दूजे पे मढ़ें दोष मचा द्वंद है विशाल 
धर्म के नाम पर भाई चारे में फुट डाल 
वर्षों से राजभोग कर उड़ा रही थी माल । 

दुश्मनों के मंसूबों को कर दिया हलाल 
दूर कर दी सारी दूरियां धो दिया मलाल 
माँ से आशीर्वाद ले ठोंक दी है ऐसी ताल 
हिन्दुस्तान बनेगा विश्व से भी बेमिसाल ।  
                                                     शैल सिंह