Thursday, 13 December 2012

Meri Rachna: ''संजीवनी''आज हृदय के द्वार पर हलचलमैंने नीर भर...

Meri Rachna:
''संजीवनी''
आज हृदय के द्वार पर हलचल
मैंने नीर भर...
: ''संजीवनी'' आज हृदय के द्वार पर हलचल मैंने नीर भरी आँखों से देखा पथ पर जाते एक बटोही को प्रिय के बिल्कुल रूप सरीखा । सिमट गया आँचल में आ...