Tuesday, 14 August 2012

हम हैं विश्व गुरु '

                                                    ' हम हैं विश्व गुरु '

हो चाँद हमारी मुट्ठी में,है करना सूरज भी बस में 
उच्च शिखर से सागर तक,हम चमकें सारे जग में 
        शांति अमन के हम प्रहरी,तुम्हें उत्पात मचाना बस आता 
        जब होगी खुश्बू आम हमारी,करनी पर होगा तूं पछताता 
हम बेजां वक्त गंवाते  ही नहीं,बेहूदा हरकत कर-कर के 
करना मुकाबला तो आओ, पथ विकास के चल कर के 
        भगवान मेरा मस्जिद बसता,अल्ला रहता मंदिर में तेरा
        हम सुनें अजान मस्ज़िद की,आरती सुन मन्दिर का मेरा 
हम चन्दन हैं महक फिजां में,बिखर रही दिन-प्रतिदिन 
यदि देते लोबान का सोंधापन,आकण्ठ लगाते निसदिन 
         चाँद पे होगा घर अपना,करेगा सूरज मेहमाननवाजी 
         हो शतरंज की चाहे जो बिसात,जीतेंगे हम हर बाजी 
जल,वायु,अवनि,अम्बर अपना,सपना हमसे ही ज़माना हो 
हम नहीं ज़माने से यारों,जग सारा हम पर ही दीवाना  हो
         हमसे रौशन क्षितिज हमारे,परचम को नस्तक विश्व करेगा 
         कभी गौरव की बुनियाद ढहाया जो, पानी आके यहाँ भरेगा 
विश्व पटल पर उभर रहे हम,नवयुग की लाली बनकर 
तरल विनम्र है मन लेकिन,तन कठोर श्रम बुद्धिबल पर 
         समय चक्र मेहरबां हमपे,दुनियाँ का संचालन हमीं करेंगे 
         नित विकास के नव डगर अग्रसर,माध्यम भी हमीं बनेंगे
हमको दुनियाँ से होड़ लगानी,सबसे आगे होंगे हिन्दुस्तानी
दुनियाँ से लोहा मनवाना,नहीं जग में हमसा है कोई सानी
          पहलू में तारे आसमान के,ध्वज शान से अंतरिक्ष लहरायेगा
          विश्व गुरु का सर ताज चढ़ा,जग जय भारत जय गायेगा ।